बुधवार 8 जुलाई 2026 - 11:48
शहीद सैयद ख़ामनेई र.ह.की शहादत पूरी मुस्लिम उम्मत के लिए बड़ी क्षति

हौज़ा / नाइजीरिया के इस्लामिक मूवमेंट के संसाधन मंच जिसकी अगुवाई शेख़ इब्राहीम ज़कज़ाकी करते हैं,उन्होने इस्लामी गणराज्य ईरान के दिवंगत नेता आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामनेई की शहादत को पूरी मुस्लिम उम्मत के लिए एक बड़ी क्षति बताया। मंच का कहना है कि उनका जीवन ईमान, सेवा, न्याय और अडिग नेतृत्व का प्रतीक था।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , फ़ोरम के अध्यक्ष प्रोफेसर अब्दुल्लाह दनलादी ने सोमवार, 15 तीर को अबूजा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह शोक संदेश उस अंतिम संस्कार से पहले जारी किया गया है, जो 18 तीर को ईरान और इराक़ में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रमों के बाद संपन्न होगा।

प्रोफेसर दनलादी ने कहा कि जो महान विद्वान और नेता अपने सिद्धांतों और आदर्शों पर अडिग रहते हैं, उनकी शहादत केवल नेतृत्व का ही नहीं बल्कि समाज में नैतिकता और ज्ञान का भी बड़ा खालीपन छोड़ जाती है।

उन्होंने कहा कि आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामनेई ने अपना पूरा जीवन इस्लाम की सेवा, न्याय की स्थापना तथा ईरानी जनता की गरिमा और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया।उन्होंने आगे कहा,तीन दशकों से अधिक समय तक उन्होंने कठिन राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य परिस्थितियों में ईरान का नेतृत्व किया।

प्रतिबंधों, बाहरी दबावों और धमकियों के बावजूद वे अपने सिद्धांतों पर दृढ़ रहे और अपने देश तथा उत्पीड़ित राष्ट्रों के अधिकारों की रक्षा करते रहे।प्रोफेसर दनलादी ने कहा कि सैयद ख़ामनेई का साहस, दृढ़ इच्छाशक्ति और सत्य के मार्ग पर अटल रहने का संकल्प उन्हें ईरान की सीमाओं से कहीं आगे सम्मान दिलाने का कारण बना।

उन्होंने कहा कि इतिहास नेताओं को केवल उनके पद के कारण नहीं, बल्कि उन आदर्शों के कारण याद रखता है जिनके लिए वे डटे रहे। उनके अनुसार, दुनिया के विभिन्न देश सैयद अली ख़ामनेई को प्रतिरोध, वर्चस्ववाद के विरोध और आधुनिक चुनौतियों का सामना करने में इस्लाम की क्षमता पर विश्वास रखने वाले नेता के रूप में याद करेंगे।

उन्होंने सूरह आले-इमरान की आयत 185 का उल्लेख करते हुए कहा कि “हर जीव को मृत्यु का स्वाद चखना है।उन्होंने कहा कि मृत्यु हर इंसान की निश्चित नियति है, लेकिन किसी व्यक्ति की महानता उसकी मृत्यु से नहीं बल्कि उसके जीवन के मूल्यों और उसके छोड़े गए नेक कार्यों से तय होती है।

उन्होंने कहा,जिस तरह हम सैयद अली ख़ामनेई से प्रेम करते थे, अल्लाह उनसे हमसे भी अधिक प्रेम करता है। इसलिए हमें अल्लाह के फैसले पर सब्र और ईमान के साथ राज़ी रहना चाहिए।

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